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एमएसएमई पल्स

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एमएसएमई पल्स: जुलाई 2026 की प्रमुख विशेषताएँ

एमएसएमई पल्स रिपोर्ट (जुलाई 2026) भारत के एमएसएमई ऋण पारिस्थितिकी तंत्र का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है। इसमें वाणिज्यिक ऋण संबंधी आंकड़ों के साथ-साथ व्यक्तिगत क्षमता में लिए गए व्यवसाय-उन्मुख ऋणों को भी शामिल किया गया है। संशोधित एमएसएमई वर्गीकरण और ₹100 करोड़ तक की बढ़ी हुई एक्सपोज़र सीमा के अनुरूप यह रिपोर्ट वाणिज्यिक ऋण प्रवाह, उधारकर्ताओं के व्यवहार तथा ऋण पोर्टफोलियो की गुणवत्ता का अधिक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

  • मार्च 2026 तक व्यक्तिगत एवं उद्यम उधारी को मिलाकर कुल बकाया वाणिज्यिक ऋण शेष ₹65.8 लाख करोड़ रहा, जिसमें व्यक्तियों की हिस्सेदारी कुल बकाया का 28% रही।
  • ₹10 लाख से अधिक कुल ऋण एक्सपोज़र वाले वाणिज्यिक उद्यमों ने मार्च 2026 तक की तीन वर्षीय अवधि में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की।
  • ₹2 लाख से ₹10 लाख के कुल ऋण एक्सपोज़र वाले उद्यमों, जिनमें नए-से-क्रेडिट (NTC) उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, ने इसी अवधि में बकाया ऋण में केवल 5% की तीन वर्षीय CAGR वृद्धि दर्ज की, जो सबसे धीमी रही।
  • वाणिज्यिक उद्यमों के नए ऋण वितरण (Originations) में नए-से-क्रेडिट (NTC) उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023 के 52% से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 42% रह गई।
  • हालाँकि बकाया ऋण स्तर पर डिफॉल्ट (Delinquency) स्थिर रहे हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में शुरुआती डिफॉल्ट के संकेत उभरकर सामने आए हैं। असुरक्षित बिजनेस लोन (BL) के लिए मार्च 2025 में दिए गए ऋणों में उत्पत्ति के बाद 12 महीनों के भीतर 90+ DPD वाले खातों की डिफॉल्ट दर समग्र औसत की तुलना में 2.9 गुना अधिक रही। इसी प्रकार, ₹2 लाख से ₹10 लाख के कुल ऋण एक्सपोज़र वाले उद्यम उधारकर्ताओं में डिफॉल्ट 2.1 गुना अधिक दर्ज किया गया।
  • विभिन्न प्रकार के ऋणदाता अलग-अलग उधारकर्ता वर्गों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) ₹10 लाख तक के एक्सपोज़र वाले उद्यमों को प्रारंभिक ऋण उपलब्ध कराने में अग्रणी हैं, जबकि NBFCs ₹10 लाख से ₹2 करोड़ तक के वर्ग में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। ₹2 करोड़ से अधिक एक्सपोज़र वाले वर्ग में निजी बैंकों का वर्चस्व है।
  • टेक्सटाइल, प्रोफेशनल सर्विसेज, थोक व्यापार तथा अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) से जुड़े उद्योगों में ₹10 लाख से ₹2 करोड़ एक्सपोज़र वर्ग का प्रभुत्व है, जबकि खुदरा व्यापार, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि एवं संबद्ध उद्योगों में ₹2 लाख से ₹10 लाख एक्सपोज़र वर्ग का वर्चस्व है।
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