माइक्रोफाइनेंस पल्स रिपोर्ट के 28वें संस्करण में आपका स्वागत है।
पिछली पांच तिमाहियों (जून 2025 – जून 2026) के दौरान, भारत के माइक्रोफाइनेंस उद्योग ने महत्वपूर्ण समेकन (consolidation) के दौर का सामना किया है, जिसके बाद अब सावधानीपूर्वक वृद्धि की वापसी दिखाई दे रही है। कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली छमाही के अंत तक, इस क्षेत्र में 7.15 करोड़ सक्रिय ऋण हैं और कुल पोर्टफोलियो बकाया (POS) 2.69 लाख करोड़ रुपये है।
संक्षिप्त सुधार के बाद फिर से संकुचन: जून 2025 से जून 2026 के बीच उद्योग के कुल पोर्टफोलियो बकाया में साल-दर-साल 12% की कमी दर्ज की गई। मार्च 2026 से जून 2026 के बीच क्षेत्र में तिमाही-दर-तिमाही 3% का संकुचन दर्ज किया गया, जो दर्शाता है कि ऋणदाता सावधानीपूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। अप्रैल–जून 2026 (AMJ’26) तिमाही के दौरान ऋण वितरण (Disbursements) घटकर 62,302 करोड़ रुपये रहा, जो JFM’26 में 78,488 करोड़ रुपये था, हालांकि इसमें सालाना आधार पर 17% की वृद्धि दर्ज की गई।
NBFC-MFIs का बाजार हिस्सेदारी में प्रभुत्व: NBFC-MFIs वर्तमान परिदृश्य में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और उद्योग के सक्रिय ऋणों, पोर्टफोलियो बकाया तथा ऋण वितरण में लगभग आधी हिस्सेदारी रखते हैं। उन्होंने उद्योग के ऋण उत्पत्ति (origination) की मात्रा और मूल्य में लगभग 50% हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जिसका लाभ पारंपरिक बैंकों द्वारा क्षेत्र में कम किए गए ऋण वितरण से उत्पन्न बाजार अवसर से मिला है।
अधिक ऋण राशि की ओर रणनीतिक बदलाव: आंकड़े ऋण देने की रणनीति में बदलाव को दर्शाते हैं, जिसमें पारंपरिक छोटी ऋण राशि वाले ऋणों से हटकर अधिक मूल्य वाले ऋणों की ओर रुख किया जा रहा है। 50,000 रुपये से कम राशि वाले ऋणों का हिस्सा तेजी से घट रहा है। 75,000 रुपये से अधिक राशि वाले उच्च-मूल्य ऋणों की बाजार हिस्सेदारी AMJ’25 में 28% से बढ़कर AMJ’26 में 41% हो गई। औसत ऋण राशि (ATS) में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि ऋणदाता अपना पूंजीगत निवेश ऐसे मौजूदा उधारकर्ताओं पर केंद्रित कर रहे हैं, जिनका स्थापित क्रेडिट इतिहास है और जो अधिक राशि के ऋण को सुरक्षित रूप से वहन करने में सक्षम हैं।
उद्योग के जोखिम प्रोफाइल में कमी: पिछले पांच तिमाहियों के दौरान सामने आए सकारात्मक विश्लेषणात्मक रुझानों में से एक उद्योग के जोखिम में कमी है। कुल 30+ दिनों की बकाया देनदारी (DPD) जून 2025 में 6.08% से घटकर जून 2026 तक केवल 1.89% रह गई। NBFC-MFIs सभी ऋणदाता श्रेणियों में सबसे कम बकाया दर दर्ज कर रहे हैं। विंटेज विश्लेषण से पता चलता है कि कैलेंडर वर्ष 2025 में दिए गए ऋणों में पुनर्भुगतान व्यवहार बेहतर रहा है।
भौगोलिक स्थिरता और उधारकर्ता ऋणभार में नियंत्रित स्थिति: जोखिम में कमी प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में भी दिखाई दे रही है। शीर्ष 10 माइक्रोफाइनेंस राज्यों में पोर्टफोलियो में कमी के साथ 30+ दिनों की बकाया देनदारी में भी गिरावट दर्ज की गई। ओडिशा में 1.25% की सबसे कम 30+ दिनों की बकाया दर दर्ज की गई। बिहार सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जिसकी कुल बाजार हिस्सेदारी 17% है। देश के 112 आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में वित्तीय समावेशन के प्रयास भी सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। इन जिलों की कुल उद्योग पोर्टफोलियो में 16% हिस्सेदारी है, जो 41,779 करोड़ रुपये के बराबर है। इन जिलों में 30+ दिनों की बकाया देनदारी जून 2025 में 5.84% से घटकर जून 2026 में केवल 1.76% रह गई।
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अंतिम अपडेट: 24-09-2026