इसमें मुझे कोई संदेह नहीं कि अगर हम लघु उद्योगों की मदद करते हैं तो राष्ट्रीय सम्पदा को समृद्ध करते हैं। मुझे इसमें भी कोई संदेह नहीं है कि सच्चे स्वदेशी इन गृह-उद्योगों को प्रोत्साहित और पुनर्जीवित करते हैं। यह लोगों की रचनात्मकता और साधनसंपन्नता को दर्शाने का एक जरिया भी है । यह देश में सैकड़ों युवाओं को जिन्हें रोजगार की जरूरत है, रोजगार प्रदान कर सकता है। इससे वर्तमान में व्यर्थ होने वाली सभी ऊर्जा को एक नई दिशा दी जा सकती है।
सिडबी 2.0
विज़न 2.0
एमएसएमई परिवेश में, अखिल भारतीय वित्तीय संस्था के रूप में उभरते हुए बैंक को एकीकृत ऋणदाता और विकास के समर्थक की भूमिका में रूपांतरित करना और वैचारिक नेतृत्व प्रदान करते हुए क्रेडिट-प्लस अवधारणा को अपनाते हुए गुणक प्रभाव बनाकर,एक समूहक के रूप में कार्य करना।
अधिक जानिएप्रत्यक्ष ऋण अन्य उत्पाद

- उच्चस्तरीय मशीनों के लिए 100% तक वित्तीय सहायता
- त्वरित मंज़ूरी एवं संवितरण
- संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में अचल संपत्ति की आवश्यकता नहीं

- पूँजीगत व्यय / कार्यशील पूँजी के लिए 100% तक वित्तीय सहायता
- त्वरित मंज़ूरी एवं संवितरण /
- लचीली प्रतिभूति रूपरेखा

- 10% सावधि जमा (एफ़डी) तथा प्रभार के विस्तार के आधार पर 100% तक वित्तीय सहायता
- 7 दिन में त्वरित मंज़ूरी
- कोई अतिरिक्त संपार्श्विक प्रतिभूति नहीं (सिडबी सावधि जमा के अलावा

- बिजली बिल घटाने में एमएसएमई की मदद
- 25 किलोवाट से 500 किलोवाट के संयंत्र वाले एमएसएमई क्षेत्र के सभी उद्यम (निर्देशात्मक)
- ऋण राशि `10 लाख से `250 लाख
- त्वरित मंज़ूरी और शीघ्र संवितरण

- पूंजीगत व्यय/ कार्यशील पूंजी के लिए 100% तक का वित्तपोषण
- एक त्वरित वितरण उत्पाद – 48 घंटों में ऋण
- क्रेडित गारंटी कवर की लागत का वहन सिडबी द्वारा किया जाता है।

- विशिष्ट आदेश के विरुद्ध कार्यशील पूंजी की आवश्यकता का 100%
- कोई प्रसंस्करण शुल्क नहीं
- कोई समय पूर्व भुगतान प्रभार नहीं।
संवर्धन एवं विकास
स्वावलंबन बेचैन सपनों को पंख
पर्यावलोकन
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उद्यमिता की पौध-शाला होते हैं। ये हमारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। सिडबी 27 वर्ष से भी अधिक समय से एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत है। इस नाते यह एमएसएमई क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विश्वसनीय संरचनागत हस्तक्षेप करने में जुटा रहा है। अल्प वित्त संस्थाओं के विकास, ग्रामीण उद्यम संवर्द्धन, प्रत्यक्ष सहायता और अपने पुनर्वित्त के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र के लिए धन की आपूर्ति बढ़ाने में सिडबी का उल्लेखनीय योगदान है। नीतिगत पैरोकारी भी सिडबी का एक महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र रहा है।और पढ़ें
क्रिसिडेक्स
कोई प्रभावी नीति बनाने के लिए उपलब्ध सूचना की गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण कारक होती है।
चूँकि सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) से संबंधित आँकड़े काफी समय के बाद प्राप्त होते हैं, अत: ज़मीनी स्तर की भावनाओं को जानने के लिए एक निर्देशी (लीड) + अंतराल दर्शाने वाला व्यापक और संक्षिप्त सूचकांक का होना - नीति निर्माताओं, उधारकर्ताओं, व्यापार निकायों, अर्थशास्त्रियों, श्रेणीनिर्धारण एजेंसियों और स्वयं एमएसई के लिए एक निर्णायक साधन बन जाता है।
भारत में अभी तक ऐसा कोई मापक उपलब्ध नहीं था, यद्यपि बड़े और मध्यम आकार के निगमित क्षेत्र का अनुवर्तन करने के लिए अनेक सूचकांक और संवेदी सर्वेक्षण कई दशकों से अस्तित्व में हैं। यद्यपि व्यवसाय चैम्बरों और विशिष्ट एजेंसियों ने एकबारगी प्रयास के रूप में कई तदर्थ सर्वेक्षण किए हैं, तथापि यह ऐसा सूचकांक में परिवर्तित होने वाला यह सतत सर्वेक्षण अपने-आप में अनूठा है।
एमएसएमई पल्स
कोई भी निर्णय करने के लिए जानकारी का होना प्रमुख है और यदि यह सही समय पर मिल जाए तो सार्थक हस्तक्षेप किए जा सकते है।
चूंकि वर्ष के दौरान एमएसएमई से संबंधित सुरचित आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं, ऐसे में कोई शुरुवाती संकेतों के न होने से नीति निर्धारण से जुड़े उन महत्वपूर्ण लोगों को, चाहे वे बैंकर हों अथवा नीति निर्धारण-करता, निर्णय करने में अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती है। अतएव नीति निर्धारकों को अंतर्दृष्टि प्रदान करने हेतु एमएसएमई क्षेत्र की नजदीकी निगरानी और अनुवर्तन के आधार पर तैयार एक व्यापक दस्तावेज़ का होना अत्यावश्यक हो जाता है।
माइक्रोफ़ाइनेंस पल्स
विश्व के विभिन्न भागों में अल्पवित्त के अंतरवर्तनों की सफलता ने इस क्षेत्र की गुणकारिता को सशक्त बनाने और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए एक संभावित उपकरण के रूप में मान्यता प्रदान की है। भारत में अल्पवित्त घटक ने पिछले दशक के दौरान निर्धनों के लिए वित्तीय सेवाओं की पहुंच में सुधार के लिए कई प्रकार के नवोन्मेषों को अपनाते हुए काफी प्रगति की है।
एक अन्य प्रमुख घटक निर्माण की पहल के रूप में सिडबी ने त्रैमासिक रिपोर्ट "माइक्रोफाइनेंस पल्स" के लिए इक्विफ़ैक्स के साथ साझेदारी की है। इस प्रकाशन के द्वारा अल्पवित्त घटक में होने वाले क्रियाकलापों का संग्राहक होने के साथ-साथ इसके भविष्य की संभावनाओं को देखने का अवसर मिलेगा।
उद्यम अभिलाषा
- 28 राज्यों के 115 आकांक्षात्मक जिलों में जहाँ कुछ विकास मापदंडों के संदर्भ में सबसे कम प्रगति देखी गयी है उसे रूपांतरित करना उद्यमिता के विभिन्न आयामों के बारे में युवाओं को उन्मुखीकरण प्रदान करना ।
- 13,800 युवाओं को आजीविका का स्रोत देकर गरिमामय जीवन प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित करना ।
- अपेक्षा है कि कम से कम 20% युवा अपने उद्यम शुरू करने में सक्षम हो सकेंगे ।
- अपेक्षा है कि लगभग 10% प्रतिभागी यानी 1150 लोगउद्यमी मित्र पर मुद्रा से ऋण लेने के लिए लाग इन कर सकेंगे।
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