एमएसएमई पल्स

एमएसएमई पल्स की आवश्यकता

कोई भी निर्णय करने के लिए जानकारी का होना प्रमुख है और यदि यह सही समय पर मिल जाए तो सार्थक हस्तक्षेप किए जा सकते है। चूंकि वर्ष के दौरान एमएसएमई से संबंधित सुरचित आंकड़े उपलब्ध नहीं होते हैं, ऐसे में कोई शुरुवाती संकेतों के न होने से नीति निर्धारण से जुड़े उन महत्वपूर्ण लोगों को, चाहे वे बैंकर हों अथवा नीति निर्धारण-करता, निर्णय करने में अपेक्षित मदद नहीं मिल पाती है। अतएव नीति निर्धारकों को अंतर्दृष्टि प्रदान करने हेतु एमएसएमई घटक की निकट निगरानी और अनुवर्तन के आधार पर तैयार एक व्यापक दस्तावेज़ का होना अत्यावश्यक हो जाता है। भारतीय बैंकिंग प्रणाली के साथ ऋण सुविधा प्राप्त कर जुड़े हुए औपचारिक ऋण की पहुँच वाले 5 मिलियन से अधिक सक्रिय एमएसएमई पर किए गए एक अध्ययन पर आधारित कोई भी रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं है। बैंकों के संबंध में कुछ आंकड़े उपलब्ध हैं, जबकि एनबीएफसीज़ के संबंध में कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, ये आंकड़े यह नहीं बताते कि कितने नए उद्यमियों ने ऋण के लिए पहुँच बनाई है और विभिन्न राज्यों में इसकी क्या स्थिति है। एमएसएमई पल्स अर्थात व्यापक तिमाही रिपोर्ट की शुरुआत इस अंतराल को भरने का एक ऐसा प्रयास है जिसका उद्देश्य ऋण उद्योग को जानकारी आधारित व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए प्रवृत्तियों की सूचना और अंतर्दृष्टि प्रदान करना है।

एमएसएमई पल्स – चतुर्थ संस्करण के मुख्य निष्कर्ष (अक्टूबर - दिसंबर 2018)

  • भारत में कुल ऋण एक्स्पोज़र रु105.5 लाख करोड़ है: सितंबर 2018 तक कुल ऋण एक्सपोजर रु105.5 लाख करोड़ रुपए रहा। एमएसएमई को दिए गए रु24.7 लाख करोड़ रुपए के ऋणों में एमएसएमई संस्थाओं को और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तियों को दिए गए ऋण शामिल हैं । बड़े और मध्यम कॉरपोरेट्स का हिस्सा रु44.4 लाख करोड़ का है। कृषि एवं खुदरा ऋण घटक के रु36.5 लाख करोड़ रुपये के अलावा, एमएसएमई ऋण एक्सपोज़र व्यवसायों के कुल एक्स्पोज़र का 35.6% है।
  • ऋण संवृद्धि दर अपने कदम जमा रही है: एमएसएमई पल्स के पिछले संस्करण में, हमने बड़े घटक की संवृद्धि को देखते हुए समग्र ऋण संवृद्धि के टिके रहने की उम्मीद की थी। वर्षानुवर्ष वाणिज्यिक ऋणों में संवृद्धि जारी है और सितंबर 18 तिमाही में वर्षानुवर्ष वृद्धि दर 13.5% रही। सितम्बर 17 में वृद्धि की मद्धम गति से उबरते हुए, बड़े (रु100 करोड़ से अधिक) घटक ने लगातार तीन तिमाहियों में उच्च ऋण वृद्धि दर्ज़ की है जो इस घटक में स्थिरता व टिकाऊपन की ओर संकेत करती है। माइक्रो (एक्सपोजर रु1 करोड़ से कम) और एसएमई (रु 1 करोड़ - रु25 करोड़) सेगमेंट क्रमशः 22.3% और 18.4% की वर्षानुवर्ष वृद्धि के साथ उनका रु 14.3 लाख करोड़ ऋण का एक्सपोज़र (24.3% वाणिज्यिक क्रेडिट एक्स्पोज़र) हैं। इसकी तुलना में’17 सितंबर से - सितंबर 18 तक वृद्धि, मध्यम घटक के लिए 7.2% (रु25 करोड़ -रु 100 करोड़) और बड़े के लिए 12.0% (रु100 करोड़ से अधिक एक्सपोज़र) रही।
  • एमएसएमई ऋण लागत: ऋण लागत अध्ययन द्वारा एमएसएमई संविभाग के प्रदर्शन की जांच, तिमाही आधार पर लाभ और हानि के दृष्टिकोण से की जाती है। अध्ययन सितम्बर 16 से जून 18 की अवधि हेतु किया गया है। अध्ययन से पता चलता है कि एमएसएमई घटक की नई एनपीए दर 1% - 1.5% प्रति तिमाही और वसूली दर 0.4% - 0.8% के बीच रही है। जून 17 से जून 18 तक की 4 तिमाहियों में उद्योग की वार्षिक ऋण लागत 1.8% रही है। यह देखते हुए कि इस घटक में शुद्ध ब्याज मार्जिन 4% से लेकर - 7% है जो उधारकर्ता के ऋण और जोखिम के प्रकार पर निर्भर करता है, घटक में आस्तियों पर प्रतिलाभ 2 - 5% के बीच होने का अनुमान लगाया जा सकता है जो कि अच्छा प्रतिफल है।
  • ऋण स्टैकिंग अध्ययन: बैंकों को 60 दिनों के भीतर अनेक ऋण लेने वाले उधारकर्ताओं के साथ विवेकपूर्ण व्यवहार करने की आवश्यकता है। ऋण स्टैकिंग अध्ययन से पता चलता है कि सितंबर 15 से सितंबर 18 के दौरान, 60 दिनों की अवधि में विभिन्न उधारदाताओं से अनेक ऋण लेने वाले उधारकर्ताओं में डिफ़ॉल्ट दर 2.5% से बढ़कर 4.4% हो गई है। यह अन्य श्रेणी निर्धारण बैंड की तुलना में कम जोखिम वाले सीएमआर -1 से सीएमआर -3 बैंड में नए अधिग्रहण के अनुपात से मापन किए गए अधिग्रहण की गुणवत्ता में मामूली गिरावट के कारण हुआ है। अध्ययन से यह भी पता चलता है कि एनबीएफसी के उधारकर्ता लोन स्टैकिंग व्यवहार का प्रदर्शन करने के लिए अधिक उद्यत हैं और 23%एनबीएफसी उधारकर्ता जिन्हें एनबीएफसी ने ऋण मंजूरी की है वे ऋण स्टैकिंग व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं और ऋण स्टैकिंग के तहत मंजूरियों में एनबीएफसी का लगभग 45% योगदान है।
  • विंटेज विश्लेषण: अनर्जित आस्तियों का विंटेज अध्ययन यह परिभाषित करता है कि एमएसएमई घटक में अधिग्रहण की गुणवत्ता में कैसे परिवर्तन आया है। इसके अंतर्गत किसी अवधि में किए गए सभी नए अधिग्रहणों पर विचार किया जाता है और पोर्टफोलियो के भीतर डिफ़ॉल्ट दरें बाद की तिमाहियों में परखी जाती हैं। मार्च 14 से जून 18 तक किए गए नए अधिग्रहण के लिए विंटेज कर्व का विश्लेषण किया गया है। यह देखा गया है कि एमएसएमई डिफ़ॉल्ट दरें 0.5% -0.8% की सीमा में चौथी तिमाही तक स्थिर रही हैं और आठवीं तिमाही की डिफ़ॉल्ट दरें 1.5% - 2.5% के बीच रही हैं। चौथी तिमाही में निजी बैंकों द्वारा अधिग्रहण 0.1%-0.3% की डिफ़ॉल्ट दरों के साथ स्थिर है – आठवीं तिमाही में यह 0.5% - 0.8% के बीच रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की डिफ़ॉल्ट दर अधिक थीं, यह चौथी तिमाही में 0.7% - 1.3% और आठवीं छमाही में 1.9 - 3.0% के बीच रही है। एनबीएफसी की डिफ़ॉल्ट दरें निजी बैंकों की तुलना में अधिक हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में चौथी तिमाही में 0.4-1.6% और आठवीं तिमाही में 1.5-3.0% से कम हैं।
  • एमएसएमई के वित्तीयन में एनबीएफसी के अंश में वृद्धि: एमएसएमई घटक में नई ऋण मंजूरियों में एनबीएफसी की हिस्सेदारी 13% से (सितंबर 15) से बढ़कर 17% (सितंबर 18) हो गई है। रु100 करोड़ से अधिक के एमएसएमई संविभाग वाले एनबीएफसी की संख्या इसी अवधि में 51 से बढ़कर 77 हो गई है, जबकि ऐसे वित्तीय संस्थाओं की कुल संख्या 128 है। उन घटकों में जिनकी एनबीएफसी फंडिंग पर सबसे ज्यादा निर्भरता है उनमें ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट, एजुकेशन, हेल्थकेयर, खनन एवं निर्माण शामिल है, इनकी एनबीएफसी फाइनेंस पर 35% निर्भरता है। शीर्ष 10 क्षेत्रों में (शीर्ष क्षेत्र आधार -पोर्टफोलियो आकार) में एनबीएफसी सबसे अधिक सक्रिय हैं, जहां एमएसएमई सेगमेंट के लिए नई ऋण मंजूरी में उनका योगदान 22% है।

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