पुनर्वित्त योजना की शुरुआत लघु उद्योगों के वित्तपोषण के लिए प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाओं की निधि आवश्यकता पूरी करने के लिए की गई है। योजना के अधीन, सिडबी पात्र प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाओं के उन मंजूर सावधि ऋणों के प्रति पुनर्वित्त मंजूर करता है, जो उक्त संस्थाएँ लघु उद्योग क्षेत्र के औद्योगिक प्रतिष्ठानों को उनकी औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के लिए और साथ ही साथ उनके विस्तार, आधुनिकीकरण एवं विविधीकरण के लिए प्रदान करते हैं।
प्राथमिक ऋणदात्री संस्थाओं के वे सावधि ऋण भी पुनर्वित्त के लिए पात्र हैं, जो अन्य विनिर्दिष्ट पात्र गतिविधियों प्रयोजनों के लिए मंजूर किए जाते हैं।
योजना के अंतर्गत पुनर्वित्त के लिए पात्र सावधि ऋणों की उच्चतम सीमा नीचे दी गई हैं:
प्र.ऋ.संस्था का प्रकार |
पुनरीक्षित उच्चतम सीमा (लाख रुपये) |
| अनुसूचित वाणिज्य बैंक और राज्य सहकारी बैंक | 300 |
| अन्य सहकारी बैंक /शहरी सहकारी बैंक | 50 |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक | 20 |
राज्य वित्त निगम /राज्य औद्योगिक विकास निगम और दोहरे दायित्व वाले औद्योगिक विकास निगम
| प्र.ऋ.संस्था का प्रकार | श्रेणी (राशि लाख रुपये) | ||
| क | ख | ग | |
| राज्य वित्त निगम | 500* | 500* | 500 |
| राज्य औद्योगिक विकास निगम | 400 | 250 | 150 |
| दोहरे दायित्व वाले औद्योगिक विकास निगम | 240 | 150 | 100 |
* सिडबी के पूर्व अनुमोदन से प्रति व्यक्तिगत उधारकर्ता की निभाव सीमा 1000 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है।
सिडबी का पुनर्वित्त व्यवसाय विभिन्न व्यवसाय योजनाओं के माध्यम से किया जाता है, जो निम्नवत् हैं :