नई लघु उद्योग इकाइयों की स्थापना या मौजूदा इकाइयों के विस्तार, आधुनिकीकरण, विविधीकरण आदि के लिए तथा इस योजना के अंतर्गत पात्र सभी कार्यकलापों के लिए। इसमें व्यावसायिक प्रैक्टिस/ परामर्शी उद्यम तथा सेवा क्षेत्र की इकाइयाँ, जैसेः- पर्यटन से जुड़ी गतिविधियाँ/ चिकित्सालय(अस्पताल) / सुश्रुषागृह(नर्सिंग होम)/ बहुचिकित्सा केन्द्र(पॉलीक्लीनिक)/ होटल/ रेस्तरां/ विपणन(मार्केटिंग) तथा एकीकृत मूलभूत ढाँचा विकास परियोजनाएँ भी शामिल हैं।
लघु उद्योग क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के संगठन (जैसे - एकल स्वामित्व, भागीदारी, कंपनी, सहकारी समितियाँ) आदि।
मूलभूत ढाँचा विकास के लिए सभी प्रकार के संगठन, यथा सार्वजनिक / निजी, लिमिटेड कंपनियाँ, भागीदारी, एकल स्वामित्व, नगरपालिकाएँ(म्यूनिसिपैलिटी), राज्य औद्योगिक विकास निगम।
यह योजना राज्य वित्त निगमों / राज्य औद्योगिक विकास निगमों / बैंकों के माध्यम से परिचालित की जाती है।
सेवा क्षेत्र की इकाइयों के संबंध में बैंकों के लिए परियोजना लागत 20 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए तथा राज्य वित्तीय निगमों/ राज्य औद्योगिक विकास निगमों के लिए विकास बैंक / लघु विकास बैंक जैसा निर्धारित करें।