घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के बाजारों में लघु उद्योग इकाइयों के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता काफी सीमा तक उनके उत्पादकता स्तरों, प्राइस फैक्टरों तथा गुणवत्ता लक्षणों पर निर्भर है। सिडबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन और आधुनिकीकरण कार्यक्रम का उद्देश्य क्लस्टरों में स्थित लघु उद्योग इकाइयों की तकनीकी क्षमताओं तथा प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार करना है। इसके अतंर्गत वाणिज्यिक रूप में प्रमाणित प्रौद्योगिकियों को लागू किया जाता है, जिसका परिणाम गुणवत्ता, उत्पादकता, लागत में कमी, ऊर्जा और कच्चे माल की बचत तथा प्रदूषण स्तर में कमी के रूप में आएगा।
सिडबी के प्रयासों के उद्देश्य मोटे तौर पर निम्नलिखित हैं :
पहले चरण में ऐसे क्लस्टरों का चयन होता है, जिनमें प्रौद्योगिकी की स्थिति, उत्पादों, उत्पादन स्तरों, व्यापार पद्धतियों तथा बेहतर प्रौद्योगिकी को ग्रहण करने की क्षमता की दृष्टि से कतिपय समानताएं होती हैं। फिर अलग-अलग क्लस्टरों को विशेषज्ञ परामर्श एजेंसियों को समनुदेशित किया जाता है, जो प्रौद्योगिकी उन्नयन आवश्यकताओं का आकलन करती हैं और इकाई विशिष्ट आधुनिकीकरण पैकेज तैयार करती हैं, जिसमें मौजूदा इकाइयों की तकनीकी क्षमताओं के समेकन की संभावनाओं का भी समावेश रहता है।
उक्त कार्य करने के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों को व्यावसायिक शुल्क के रूप में उपयुक्त पारिश्रमिक दिया जाता है।