यह कार्यक्रम ग्रामीण उद्योगीकरण के लिए एक विशिष्ट दृष्टिकोण है, जिसके अन्तर्गत सिडबी द्वारा स्थापित परामर्श संगठन के माध्यम से संभाव्य उद्यमियों को लघु उद्यमों की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया जाता है और सहायता दी जाती है।
स्थानीय उद्यमी प्रतिभा को बढ़ावा देकर ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी भारत में विकासक्षम व आत्मनिर्भर अतिलघु / लघु उद्यमों का विकास करना। यह कार्यक्रम ग्रामीण बेरोज़गारी, शहरी प्रव्रजन/प्रवासन एवं स्थानीय निपुणता व संसाधनों के अपूर्ण उपयोग जैसी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है और यह विस्तृत व्यवसाय विकास सेवा कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है।
बैंक के ग्रामीण उद्योग कार्यक्रम के अंतर्गत आधारभूत निविष्टियों का संगठित एवं समेकित पैकेज़ प्रदान किया जाता है, जैसे - उद्यम संवर्द्धन के उद्देश्य से समुचित प्रौद्योगिकी तथा विपणन सुविधा के साथ सूचना, उत्प्रेरण, प्रशिक्षण एवं
ऋण ।
अल्प विकसित क्षेत्रों का विकास : ग्रामीण उद्योग कार्यक्रम के अन्तर्गत, आर्थिक दृष्टि से अल्पविकसित जिले की पहचान की जाती है एवं संभाव्य उद्यमियों को निविष्टियों व व्यवसाय विकास सेवाओं का एक व्यापक एवं समेकित पैकेज उपलब्ध कराने के लिए विकास व्यवसायिकों, तकनीकी परामर्श संगठन अथवा गैर-सरकारी संगठन को कार्यान्वयन एजेंसी बनाया जाता है। चिह्नित कार्यान्वयन एजेंसी कार्यक्षेत्र - स्तर पर व्यवसायियों का एक दल पाँच वर्ष की अवधि के लिए तैनात करती है। कार्यान्वयन एजेंसी, कार्यान्वयन के बाद भी सहायता उपलब्ध कराती है, ताकि उद्यमों की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।
समेकित दृष्टिकोण : कार्यान्वयन एजेंसी सेवाओं का जो पैकेज़ उपलब्ध कराता है उनमें, अन्य बातों के साथ-साथ, ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों की पहचान करना एवं उनको प्रोत्साहित करना, स्थानीय कौशल व संसाधनों पर आधारित व्यवहार्य उद्यमों की पहचान, प्रशिक्षण, उपयुक्त प्रौद्योगिकी संपर्क-स्थापना तथा औपचारिक बैंकिंग क्षेत्र से वित्तीय व्यवस्था कराना शामिल है।
कार्यनिष्पादन उन्मुख प्रोत्साहन : उद्यमों की स्थापना प्रौद्योगिकीय एवं आर्थिक आधार पर की जाती है। उद्यमियों के लिए कोई सब्सिडी अथवा अनुदान उपलब्ध नहीं होता है। प्रारंभिक प्रशासनिक सहायता के अतिरिक्त, परियोजना के आकार के आधार पर, कार्यान्वयन एजेंसी को प्रति इकाई 500 रुपये से 7000 रुपये तक कार्यनिष्पादन शुल्क अदा किया जाता है।
प्रवर्तित उद्यम की दीर्घकालीन व्यवहार्यता एवं टिकाऊपन, ग्रामीण उद्योग कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। नए उद्यमों को कम से कम उनके परिचालन के प्रथम वर्ष के दौरान सतत सहायता की आवश्यकता होती है। अतः, प्रारंभिक कार्यनिष्पादन शुल्क के अलावा, कार्यनिष्पादन एजेंसियों को मंजूरी-पश्चात प्रोत्साहन के माध्यम से प्रति इकाई 1000 रुपये की राशि देय होती है। यह राशि सहायताप्राप्त उद्यमियों को अनुरक्षण सेवाएँ उपलब्ध कराने एवं मंजूरी-पश्चात कार्यों के लिए दी जाती है।
एक उप-क्षेत्रवार दृष्टिकोण अपनाया जाता है, ताकि कार्यान्वयन एजेंसियाँ उद्यमियों को आवश्यक अग्रगामी और पश्चगामी (पूर्वापार) सुविधाएँ उपलब्ध करा सकें।
विपणन सहयोग : उद्यमियों को घरेलू व्यापार मेलों तथा प्रदर्शनी-सह-बिक्री आयोजनों में सामूहिक सहभागिता के लिए सहायता दी जाती है।