लघु उद्योगों में प्रबंधन विकास क्षेत्र की पहचान हस्तक्षेप करने हेतु एक निर्णायक क्षेत्र के रूप में की गई है ताकि लघु उद्योग इकाइयों की व्यवहार्यता, प्रतिस्पर्धा व लाभप्रदता को बढाया जा सके, विशेषकर इस बदलते वर्तमान आर्थिक परिप्रेक्ष्य में जब बाजार के अवरोधों को धीरे धीरे समाप्त किया जा रहा है. लघु उद्योग क्षेत्र में मानव संसाधन विकास की कमियों को दूर करने के लिए सिडबी द्वारा लघु उद्योग प्रबंधन कार्यक्रम (सीमैप) और कौशल सह प्रौद्योगिकी उन्न्यन कार्यक्रम (स्ट्प) की शुरुआत कर पहल की गई है. सीमैप का लक्ष्य अर्हता प्राप्त बेरोजगारों को और उद्योग द्वारा प्रायोजित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित करना ताकि लघु उद्योगों को कम लागत वाले और सक्षम प्रबंधकों को उपलब्ध करवाना है तथा स्टप का लक्ष्य लघु उद्योगों के मालिकों /प्रबंधकों को प्रशिक्षित करना है.
उद्देश्य
यह कसीमैप का उद्देश्य ऐसे औद्योगिक प्रबंधकों को तैयार करना है जो विशेष रूप से लघु उद्यमियों के बहुविध दायित्वों के निष्पादन में मदद कर सकें. यह कार्यक्रम नए स्नातकों को उत्पादक रोजगार उपलब्ध करने के लिए मार्ग प्रशस्त करता है जो व्यावसायिक अर्हता प्राप्त नहीं है.
प्रबंधन को सुदृढ् करने के लिए इस कार्यक्रम् द्वारा बेरोजगार गैर प्रौद्योगिकी स्नातकों, डिप्लोमा धारकों और उद्योग द्वारा प्रायोजित प्रतिभागियों को लक्ष्य किया जाता है
यह कार्यक्रम लगभग एकसमान आकार, स्वामित्व, उद्योग की प्रकृति तथा वर्तमान वित्तीय/कार्य स्थिति वाली इकाइयों के उद्यमियों/वरिष्ठ कार्यपालकों के समूहों हेतु तैयार किया गया है।
इस कार्यक्रम का आयोजन साधारणतया 14-18 सप्ताह की अवधि के दौरान तीन चरणों में किया जाता है. पहला चरण 5-8 सप्ताह का होता है जिसमें कक्षाओं में सत्र आयोजित किए जाते हैं, इसमें लघु उद्योगों के लिए प्रबंध कौशल, तत्संबंधित ज्ञान व सूचना का अवश्य समावेश होता है. तत्पश्चात दूसरे चरण में 8 सप्ताह के लिए लघु उद्योग इकाइयों में काम के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है. अंतिम 1-2 सप्ताह के दौरान पाठ्यक्रम प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने से पूर्व अर्जित ज्ञान की समीक्षा/पुन: स्मरण कराया जाता है