लघु उद्योगों को भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धी दरों पर वित्त प्राप्त करने में समर्थ बनाना, ताकि वे अपनी निर्यात वचनबद्धताओं को पूरा कर सकें।
लघु उद्योग क्षेत्र के औद्योगिक प्रतिष्ठान तथा सरकार से मान्यताप्राप्त निर्यात/व्यापार गृह जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र से करते हैं और जो
नौभरणपूर्व विदेशी मुद्रा ऋण (पीसीएफसी)अमरीकी डॉलर तथा यूरो मुद्राओं में प्रदान की जा रही है। रुपया सहायता भी दी जाती है, जो विदेशी मुद्रा सीमाओं से स्वतंत्र होती है।
मात्रा - आवश्यकता आधारित, जो कार्यशील पूँजी अंतर पर आधारित होती है।
ऋण अवधि - "त्पादन चक्र पर आधारित (अधिकतम - 180 दिन)
मार्जिन - न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा अधिकतम 25 प्रतिशत
चुकौती - 180 दिन की अधिकतम अवधि के भीतर निर्यात बिलों की भुनाई/बेचान के जरिये
ब्याजदर -
पीसीएफसी हेतु - 6 माह लिबोर के ऊपर 0.75% से अधिक नहीं