भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की स्थापना अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के संवर्द्धन, वित्तपोष ण और विकास तथा इसी प्रकार की गतिविधियों में संलग्न संस्थाओं के कामकाज में समन्वय के लिए 2 अप्रैल, 1990 को संसद के एक अधिनियम के अंर्तगत प्रधान वित्तीय संस्था के रूप में की गई थी।
सिडबी की स्थापना 2 अप्रैल 1990 को हुई। इसकी स्थापना संबंधी अधिकार पत्र- भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 में सिडबी की परिकल्पना लघु उद्योग क्षेत्र के उद्योगों के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास और लघु उद्योग क्षेत्र के उद्योगों को संवर्द्धन व वित्तपोषण अथवा विकास में लगी संस्थाओं के कार्यों में समन्वय करने और इसके लिए प्रासंगिक मामलों के लिए प्रमुख वित्तीय संस्था के रूप में की गई है।
सिडबी के कारोबार के दायरे में लघु उद्योग इकाइयाँ समाहित हैं, जो उत्पादन, रोजगार और निर्यात की दृष्टि से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान करती हैं। लघु उद्योग ऐसी औद्योगिक इकाइयाँ हैं, जिनमें प्लांट व मशीनरी में निवेश 1 करोड़ रुपये से अधिक न हो। ऐसी इकाइयों की संख्या लगभग 31 लाख है जिनमें 1.72 करोड़ व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है और भारत के निर्यात में उनका हिस्सा 36 प्रतिशत तथा औद्योगिक विनिर्माण में 40 प्रतिशत है। साथ ही, सिडबी की सहायता परिवहन, स्वास्थ्य-सेवाओं और पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ ऐसे प्रोफेशनल और स्व-नियोजित व्यक्तियों को भी उपलब्ध है, जो लघु आकार के प्रोफेशनल उद्यम स्थापित करते हैं।
दि बैंकर, लंदन की हालिया रैंकिंग में सिडबी ने विश्व के 30 सर्वोच्च विकास बैंकों में अपनी जगह बनाए रखी।
दि बैंकर, लंदन के मई 2001 अंक के अनुसार पूँजी व आस्तियों की दृष्टि से सिडबी का स्थान 25वाँ था।