लघु उद्योग उत्पादों का विपणन
उद्देश्य
- लघु उद्योग इकाइयों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, ताकि वे घरेलू और ऩिर्यात बाजार में अपनी कुल बिक्री बढ़ाने के लिए आवश्यक विभिन्न गतिविधियाँ चला सकें।
- निगमित निकायों का वित्तपोषण करना, ताकि वे लघु उद्योग क्षेत्र की विपणन क्षमताओं में सुधार हेतु उन्हें सहयोग सेवाएं तथा ढाँचागत सुविधाएं प्रदान कर सकें।
पात्र उधारकर्ता
- अच्छे कार्यनिष्पादन रिकॉर्ड तथा सुदृढ़ वित्तीय स्थिति वाली मौजूदा लघु उद्योग इकाइयाँ उक्त योजना के अंतर्गत सहायता हेतु पात्र हैं। चुनिंदा आधार पर नई इकाइयों को भी सहायता देने पर विचार किया जा सकता है।
- निगमित निकाय के स्वरूप वाले वे विशेषीकृत संगठन जो लघु उद्योग क्षेत्र को विपणन सहायता, मूलभूत ढाँचा तथा सहयोग सेवाएँ प्रदान करते है।
उद्देश्य
- उक्त योजना के अंतर्गत सहायता विभिन्न विपणन संबंधी गतिविधियाँ चालने के लिए प्राप्त की जा सकती है, जैसे -
1. विपणन अनुसंधान
2. अनुसंधान और विकास, उत्पाद उन्नयन तथा मानकीकरण
3. रणनीतिक विपणन योजना तैयार करना
4. विज्ञापन, ब्रांडिंग, सूची तैयार करना, दृश्य श्रव्य सहायक सामग्री का निर्माण आदि
5. व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में सहभागिता, बिक्री संवर्द्धन दौरे करना आदि
6. वितरण नेटवर्क स्थापित करना, जिसमें शोरूम/ खुदरा केंद्र तथा भंडारण सुविधाएं शामिल हैं।
7. विपणन संबंधी गतिविधियों में कार्मिकों का प्रशिक्षण आदि
- विपणन, मुख्यतः लघु, कुटीर एवं ग्रम उद्योगों के उत्पादों के विपणन के लिए नए शोरूमों की स्थापना और/अथवा मौजूदा शोरूमों का नवीकरण। ऐसे शोरूम देश में अथवा विदेश में स्थापित किए जा सकते हैं।
- मूलभूत ढाँचे, जैसे- स्थायी प्रदर्शनी केंद्रों, औद्योगिक पार्कों यथा वस्त्र तथा सॉफ्टवेयर पार्क, विपणन इंपोरियम, डिजाइन तथा फैशन पूर्वानुमान स्टूडियो, नीलामी घर( यथा पुष्प उत्पादों हेतु), कंटेनर डिपो तथा कंटेनर फ्राइट स्टेशन तथा ट्रेड सेंटर (भारत मे तथा विदेश में) का विकास। ऐसी ढाँचागत परियोजनाओं से मुख्यतः लघु, कुटीर तथा ग्रामीण उद्योग लाभान्वित होने चाहिए।
- लघु उद्योग इकाइयों को विपणन सहायता प्रदान करने हेतु सुविधाओं की स्थापना, जैसे - डेटा बैंक, पुस्तकालय, इंटरनेट सेवाएं आदि।
- घरेलू अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लघु उद्योग उत्पादों के विपणन के संवर्द्धन की दिशा में कोई अन्य गतिविधि
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