सूक्ष्म और लघु उद्यमों क्षेत्र को ऋण आम तौर पर उच्च जोखिम ऋण के रूप में माना जाता है, तो और अधिक, जब कोई संपार्श्विक के अभाव है. बैंकों को और अधिक इस क्षेत्र को उधार देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए भारत और सिडबी की सरकार की स्थापना की है जुलाई 2000 में क्रेडिट कुटीर और लघु उद्यम (CGTMSE) के लिए गारंटी फंड ट्रस्ट को जमानत के लिए ऋण गारंटी समर्थन खाली / तीसरे पक्ष की गारंटी प्रदान करना रुपए को मुक्त ऋण. 100 अपने क्रेडिट गारंटी योजना (तटरक्षक पोत) के तहत सूक्ष्म और लघु उद्यम (mses) के लिए बैंकों और उधार देने की संस्थाओं द्वारा दिए लाख.
इंडिया एसएमई टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड (आईएसटीएसएल) की स्थापना नवंबर 2005 में हुई। यह एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर आधुनिक प्रौद्योगिकियों के अभिग्रहण के लिए मंच प्रदान करता है। आईएसटीएसएल एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योकिगी अंतरण के लिए तकनीकी सेवाएं प्रदान करने और ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की अपनी रणनीति जारी रखे हुए है।
एमएसएमई क्षेत्र में प्रौद्योगिकीय आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने और उसमें तेजी लाने के लिए आईएसटीएसएल ने ऐसे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भागीदारी की है जो इसी प्रकार की गतिविधियों में लगे हैं। आईएसटीएसएल ने के एफ डब्ल्यू, जर्मनी के सहयोग से जोधपुर के स्टेनलेस स्टील री-रोलिंग क्लस्टर में ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन की परियोजना आरंभ की। इस परियोजना में ऊर्जा दक्षता उपायों के कार्यान्वयन के ज़रिए स्वच्छ विकास प्रणाली (सीडीएम) का कार्यान्वयन आरंभ किया गया है। आशा है कि इससे इकाइयों की ईंधन लागत में कमी आने के साथ-साथ, सीडीएम आय भी होगी।
एसएमई रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लि. |
सिडबी ने सार्वजनिक क्षेत्र, विदेशी एवं निजी क्षेत्र के अग्रणी बैंकों और डन एंड ब्रैडस्ट्रीट इन्फर्मेशन सर्विसेज इंडिया प्रा. लि. (डीएंडबी) के साथ मिलकर सितंबर 2005 में एसएमई एजेंसी ऑफ इंडिया लि. की स्थापना की। यह एमएसएमई को समर्पित तृतीय पक्ष रेटिंग एजेंसी है जो व्यापक, पारदर्शी और विश्वसनीय रेटिंग तथा जोखिम प्रोफाइलिंग प्रदान करती है।
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इंडिया एसएमई ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लि. |
इंडिया एसएमई ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लि. इंडिया एसएमई ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लि. (इसार्क) देश की ऐसी पहली ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी है जो एमएसएमई पर केंद्रित है और जो गैर निष्पादक आस्तियों के त्वरित समाधान पर ध्यान देती है। इसके लिए यह निष्किय एनपीए को उत्पादक उद्देश्यों के लिए खोलती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र से एमएसएमई में अधिक मात्रा में और सरल तरीके से ऋण पहुँच पाता है। इसार्क की स्थापना अप्रैल 2008 में हुई। इसका उद्देश्य गैर निष्पादक खातों का अभिग्रहण करना और समाधान के नवोन्मेषी तरीकों से वसूली के मूल्य को अधिकाधिक बढ़ाने के प्रयत्न करना है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने एआरसी के रूप में पंजीकरण-प्रमाणपत्र देते समय जो शर्तें विनिर्धारित की थीं, उनका भी इसने अनुपालन किया है और 15 अप्रैल, 2009 से पूरी तरह परिचालनरत है। |