अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक | प्रबंधन | वरिष्ठ प्रबंधन | विभाग प्रमुख | अंचल कार्यालयों के प्रमुख
विशिष्टताएं
सामाजिक दृष्टि से जिम्मेदार संगठन के रूप में बैंक अपने कार्य-व्यापार उचित और पारदर्शी रूप में चलाता है, जिसके लिए वह प्रोफेशनिज्म के सर्वोच्च मानदंड, सच्चाई, ईमानदारी, और नैतिक व्यवहार अपनाता है। वह एक ऐसी संस्कृति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें किसी भी स्तर पर अस्वीकार्य/ अनैतिक व्यवहार्य तथा दुर्व्यवहार की किसी घटना के बारे में चिन्ता जाहिर करना सभी के लिए सुरक्षित हो। तदनुसार, बैंक में विसल ब्लोअर नीति लागू करने का निर्णय किया गया है, जो इस प्रकार हैः-
महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ 1. भारत सरकार द्वारा नियुक्त विनिर्दिष्ट एजेंसी के रूप में सीवीसी, बैंक के किसी भी कर्मचारी के बारे में लिखित शिकायतें अथवा भ्रष्टाचार के किसी भी आरोप अथवा पद के दुरुपयोग के बारे में प्रकटन प्राप्त करेगा। 2. विनिर्दिष्ट एजेंसी शिकायतकर्ता की पहचान का पता लगाएगी। यदि शिकायतकर्ता गुमनाम हो तो वह मामले पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी।
3. शिकायतकर्ता की पहचान तब तक जाहिर नहीं की जाएगी, जब तक कि शिकायतकर्ता ने खुद ही अपनी शिकायत को सार्वजनिक न कर दिया हो या अपनी पहचान किसी दूसरे कार्यालय अथवा प्राधिकारी पर सार्वजनिक न कर दी हो।
4. आगे रिपोर्ट मंगाते/जाँच करते समय, सीवीसी सूचना-प्रदाता की पहचान प्रकट नहीं करेगा और साथ ही संबंधित संगठन के प्रमुख से अनुरोध करेगा कि यदि उक्त प्रमुख ने किसी कारणवश सूचना-प्रदाता को पहचान लिया हो, तो भी वह उक्त सूचना-प्रदाता की पहचान को गुप्त रखे।
5. प्राप्त शिकायत के फलस्वरूप जाँच पूरी करने के लिए, आवश्यकतानुसार सीबीआई अथवा पुलिस प्राधिकारियों की मदद लेने का अधिकार सीवीसी को होगा।
6. यदि किसी व्यक्ति को इस आधार पर शिकायत हो कि शिकायत करने अथवा प्रकटन के कारण उसे उत्पीड़ित किया जा रहा है तो वह इस विषय में समाधान के लिए सीवीसी के पास आवेदन कर सकता है, जिसमें सीवीसी संबंधित व्यक्ति अथवा प्राधिकारी को समुचित निर्देश दे सकता है।
7. यदि सीवीसी का ऐसा मत हो कि शिकायतकर्ता अथवा गवाहों को सुरक्षा की जरूरत है तो वह संबंधित सरकारी प्राधिकारियों को उचित निर्देश जारी करेगा।
8. यदि सीवीसी को लगे कि शिकायत किसी दुष्प्रेरणा से अथवा तंग करने के उद्देश्य से की गई है तो उसे उचित कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी।
9. जिस मामले के संबंध में लोक सेवक (जाँच) अधिनियम, 1850 के अंतर्गत सार्वजनिक जाँच बैठा दी गई हो अथवा जिस मामले को जाँच आयोग अधिनियम 1952 के अंतर्गत जाँच के लिए सौंप दिया गया हो उसके संबंध में किए गए प्रकटन पर सीवीसी ध्यान नहीं देगा न ही जाँच करेगा।
10. सूचना प्रदाता की पहचान जाहिर न करने के संबंध में सीवीसी के निर्देशों के बावजूद यदि सूचना-प्रदाता की पहचान जाहिर कर दी गई हो तो सीवीसी को अधिकार है कि ऐसा प्रकटन करनेवाले व्यक्ति अथवा एजेंसी के विरुद्ध वह प्रचलित विनियमों के अनुसार उचित कार्रवाई आरंभ करे।
इस नीति के अंतर्गत जो भी शिकायत की जाए उसे निम्नलिखित आयामों के अनुरूप होना चाहिएः
1. शिकायत किसी बंद/सुरक्षित लिफाफे में होनी चाहिए और सीधे केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजी जानी चाहिए, जिसका पता निम्नलिखित हैः सचिव केंद्रीय सतर्कता आयोग भारत सरकार सतर्कता भवन जीपीओ कॉम्प्लेक्स ब्लॉक –ए, आईएनए नई दिल्ली 110 023
2. लिफ़ाफ़ा सचिव, केंद्रीय सतर्कता आयोग को संबोधित होना चाहिए और उस पर “लोक हित प्रकटन के अंतर्गत शिकायत” लिखा होना चाहिए। यदि लिफाफे पर यह न लिखा हो और वह बंद न हो, तो सीवीसी के लिए शिकायतकर्ता को उक्त संकल्प के अंतर्गत सुरक्षा दे पाना संभव नहीं होगा और उस शिकायत पर सीवीसी की सामान्य शिकायत नीति के अनुसार कार्रवाई होगी। शिकायतकर्ता को शिकायत की शुरुआत में अथवा अंत में अथवा संलग्न पत्र में अपना नाम व पता देना चाहिए।
3. सीवीसी गुमनाम / छद्मनाम वाली शिकायतों पर ध्यान नहीं देगा।
4. शिकायत की विषयवस्तु का मसविदा ध्यानपूर्वक लिखा जाना चाहिए, ताकि उसमें शिकायतकर्ता की खुद की पहचान का विवरण या संकेत उसमें न आने पाए। किन्तु शिकायत के ब्यौरे विशिष्ट और सत्यापन करने योग्य होने चाहिए।
5. सीवीसी कोई पावती नहीं जारी करेगा, ताकि व्यक्ति की पहचान छिपी रहे। विसल ब्लोअरों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खुद के हित में, सीवीसी से आगे कोई पत्र-व्यवहार न करें। सीवीसी आश्वासन देता है कि, यदि मामले के तथ्य सत्यापन-योग्य हुए, तो वह पीआईडीपीआई के संबंध में भारत सरकार के संकल्प के अंतर्गत किए गए प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा। यदि किसी और स्पष्टीकरण की जरूरत हुई तो शिकायतकर्ता से सीवीसी संपर्क करेगा।
6. इस संकल्प के अनुसार, दुर्भावनावश/तंग करने के उद्देश्य से शिकायत करनेवालों के विरुद्ध भी आयोग कार्रवाई कर सकता है। |