भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) की स्थापना भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत 2 अप्रैल 1990 को हुई। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के संवर्द्धन, वित्तपोषण और विकास के लिए तथा इसी प्रकार की गतिविधियों में जुटी अन्य संस्थाओं के कार्यों में समन्वय स्थापित करने के लिए प्रमुख वित्तीय संस्था है। वित्तीय सहायता पात्र प्राथमिक वित्तीय संस्थाओं जैसे बैंकों, राज्य वित्तीय निगमों, राज्य औद्योगिक विकास निगमों, राज्य लघु उद्योग विकास निगमों आदि के माध्यम से पुनर्वित्त के रूप में दी जाती है, ताकि वे आगे एमएसएमई को उधार दे सकें। गैर-सरकारी संगठनों/ सूक्ष्म वित्त संस्थाओं को ऋण, अनुदान, ईक्विटी एवं अर्ध-ईक्विटी के रूप में सहायता दी जाती है, ताकि वे सूक्ष्म उद्यमों और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उधार दे सकें और उनको लंबे समय तक के लिए आय-अर्जक गतिविधियाँ आरंभ करने योग्य बना सकें। बैंक के 103 शाखा कार्यालयों के माध्यम से एमएसएमई को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान की जाती है।
वित्तपोषण एमएसएमई की बुनियादी जरूरत है, जबकि उनको विभिन्न प्रकार की ऋणेतर सुविधाओं की भी जरूरत होती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा-क्षमता हासित करने में उनको सहूलियत हो। इस तरह की जरूरते हैं ईक्विटी पूँजी, साख-निर्धारण, प्रौद्योगिकी अंतरण और प्रौद्योगिकी उन्नयन आदि। एमएसएमई क्षेत्र की उभरती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार की संस्थागत प्रणालियाँ विकसित करने के उद्देश्य से सिडबी लगातार काम करता आ रहा है और इसने विभिन्न सहायक / सहयोगी संस्थाएं स्थापित की हैं, जो इस प्रकार हैं-
सिडबी वेंचर कैपिटल लि. (एसवीसीएल) इसकी सहायका संस्था है। एसवीसीएल की स्थापना 1999 में हुई। वर्तमान में यह दो उद्यम पूँजी निधियों का प्रबंधन संभाल रही है।
क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेस (सीजीटीएमएसई) की स्थापना भारत सरकार और सिडबी ने जुलाई 2000 में की। इसका उद्देश्य बैंकों तथा ऋणदात्री संस्थाओं द्वारा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को प्रदान किए गए संपार्श्विक रहित / तृतीय पक्ष गारंटी-रहित ऋणों के लिए ऋण गारंटी सहायता प्रदान करना है।
एसएमई रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लि. (स्मेरा) की स्थापना सितंबर 2005 में हुई। यह एमएसएमई को समर्पित तृतीय पक्ष रेटिंग एजेंसी है, जो व्यापक, पारदर्शी और विश्वसनीय रेटिंग तथा जोखिम प्रोफाइलिंग प्रदान करती है।
इंडिया एसएमई टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड (आईएसटीएसएल) की स्थापना नवंबर 2005 में हुई। यह एमएसएमई को एक ऐसा वैश्विक मंच प्रदान करता है, जहाँ से वे आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ अपना सकें।
• इंडिया एसएमई ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लि. (इसार्क) देश की पहली आस्ति पुनर्निर्माण कंपनी है जो एमएसएमई पर केंद्रित है और बेकार पड़े एनपीए को खोलकर उत्पादक उद्देश्यों के लिए उनका त्वरित समाधान देने की कोशिश करती है। इससे बैंकिंग क्षेत्र से एमएसएमई क्षेत्र में और अधिक मात्रा में तथा सरलतापूर्वक ऋण-प्रवाह में मदद मिलेगी।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास के लिए विश्वसनीय सूचना का समय पर मिलना अनिवार्य अपेक्षा है, ताकि वे अवसरों की पहचान करके समुचित रणनीति तैयार कर सकें। एमएसएमई संबंधी सूचना सिडबी की पहलकदमी है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की सूचना संबंधी दक्षता में सुधार लाना है। एमएसएमई सूचना का प्रयास होगा कि उपयोगकर्ताओं को एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित कई प्रकार की सूचनापरक सामग्री सरलता से उपलब्ध कराई जाए। इसमें एमएसएमई संबंधी नीतियाँ, एमएसएमई प्रकाशन, रिपोर्टें, एमएसएमई संबंधी महत्त्वपूर्ण परिपत्र, भारत सरकार,मंत्रालयों, भारतीय रिज़र्व बैंक, के दिशा-निर्देश शामिल हैं। एमएसएमई क्षेत्र के लिए प्रासंगिक सामग्री का एकल-बिन्दु एवं व्यापक स्रोत होने से न केवल एमएसएमई को लाभ होगा, बल्कि इस क्षेत्र के विभिन्न जोखिम-धारक जैसे- सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं, वाणिज्य बैंक एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ भी इससे लाभान्वित होंगी।
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